ऋषिकेशभेंटवार्तास्वास्थ्य

*कोरोना और बदलते मौसम में आंखों की देखभाल-सुविख्यात नेत्र चिकित्सक डॉ सुनील चतुर्वेदी से खास बातचीत*

ऋषिकेश- बदलते मौसम के परिवेश में और कोरोना काल में शरीर की देखभाल की आवश्यकता इन दिनों बेहद जरूरी हो गई है। हम अपने शरीर की देखभाल तो करते हैं लेकिन जिसके कारण यह दुनिया जहान हमें दिखाई देती है उसे भूल जाते हैं।
कोरोनावायरस और बदलते मौसम में इन दिनों गर्मी की शुरुआत हो गई है और गर्मी में आंखों का संक्रमण कुछ ज्यादा ही होता है। इसके साथ ही इन दिनों ज्यादा बाहर निकलना नहीं होता है और हम लगातार टीवी, मोबाइल, लैपटॉप पर अपनी नजरें गड़ाए रहते हैं। इससे आंखों पर कुछ ज्यादा ही जोर पड़ता है। आंखों की देखभाल कैसे की जाए क्या -क्या सावधानियां हैं इस विषय में ऋषिकेश शहर के जाने-माने सुविख्यात डॉक्टर सुनील चतुर्वेदी से हमारी एक मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान डॉक्टर सुनील चतुर्वेदी ने आंखों की देखभाल के लिए क्या क्या सावधानियां होनी चाहिए? डॉक्टर साहब ने विस्तार से बताया।
यदि आप भी आंखों की समस्यायों से परेशान हैं, तो निम्न तरीकों से आँखों की देखभाल करे-

आंखे हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील डायस हैं। लॉकडाउन में ऑनलाइन होने का सबसे ज़्यादा नुकसान आँखों को ही उठाना पड़ा है। ऐसे में जानिए कि कैसे रखना है अपनी आँखों का खयाल-
डॉ सुनील कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि लगातार स्क्रीन पर देखने के कारण नज़रें बनी रहें। यदि कोई परेशानी हैं, तो इन 5 आसान तरीकों से आंखों को आराम दें।
आप अपनी त्वचा और स्वास्थ संबंधी समस्याओं से सामना के लिए ना जाने क्या क्या करते हैं, पर क्या कभी अपनी आँखों के बारे में सोचा है, जिससे आप यह खूबसूरत दुनिया देखते हैं। अगर नहीं तो अब समय है अपनी आँखों के बारे में सोचने का।

कोरोना काल और आंखों की देखभाल-
आज विश्व एक तरफ कोरोना से लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ घर पर रहकर अपने सभी काम ऑनलाइन करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसकी वजह से शक्रीन का असर आँखों पर पड़ रहा है। लगातार शक सूरत पर रहने, देर रात तक जागने और अन्य कारणों से आँखों को बहुत जियादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिससे आंखों में थकावट, सूखापन और कमजोर दृष्टि जैसी समास्याएं आ रही हैं।

दिनभर फोन चलाना आपकी आंखों के लिए खतरनाक है, काम ना हो तो फोन का इस्तेमाल ना ही करें।
ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी आंखों की खास देखभाल करें। आइए जानते हैं आंखों की सेहत के लिए जरूरी हैं कुछ खास उपाय-

हेल्दी आइ के लिए कुछ हेल्दी टिप्स
1.शी डायरी का सेवन करें
ओमेगा -3 फैटी एसिड और विटामिन सी और ई में उच्च खाद्य पदार्थ से अपने प्लेट को भरें। ये पोषक तत्व मैक्यूलर डिजनरेशन या मोतियाबिंद के विकास की आपकी संभावना को कम करने में मदद कर सकते हैं। हरी सब्जियों, साल्मन क्रीम्ली, अंडे और खट्टे फल शुरू करने के लिए एक बढ़िया विकल्प हैं!

ओमेगा 3 अंधाता के लिए बेहद फायदेमंद है। सीएचटीआर: ट्रस्टॉक
एक स्वस्थ आहार भी डाय की संभावना को कम करता है, जो आपकी आंखों की रोशनी को कम करने के प्रमुख कारणों में से एक है।

2.सुरक्षात्मक आईवियर का उपयोग करें-
हर साल भविष्यवाणी 2.5 मिलियन से भी अधिक लोग आई इंजरी से ग्रस्त होते हैं, इसलिए खुद को आँखों की चोटों से बचाने के लिए उचित आईवियर पहनना बहुत महत्वपूर्ण है।

शोक्रीन पर काम करते समय बहुत जरूरी है कि आप ट्यूटोरियल पहनें। अगर विज़न कुछ हल्का हो रहा है, तो संक्षेप में जांच करवाएँ।

3.बाहर निकलते वक़्त सनग्लास का उपयोग करना
ठंड हो या गर्मी धूप की किरणें आपकी आँखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचने के लिए जब भी आप घर से बाहर निकलते हैं, तो अपने सनग्लासेस लेने ना भूले।

आँखों पर चश्मा पहनना भी आपके संक्रमण के रिस्क को कम कर सकता है।
यह आपकी आँखों को सूर्य की यूवीए से बचानेएगी जो अक्सर आपकी आँखों पर असर डालती हैं।

4. समय-समय पर स्क्रीन से ब्रेक लें
आज छोटे बच्चे हों या घर के बड़े सभी फोन लैपटाप चला रहे हों। ऐसे में आँखों पर असर तो पड़ेगा ही। ध्यान रखें कि लगातार स्क्रीन के सामने आधे घंटे से अधिक न बैठें यह आपकी आंखों को नुकसान पहुंचाती है। इसीलिए हर 20 से 25 मिनट के बाद 5 मिनट का ब्रेक अपने फोन या लैपटॉप से ​​जरूर लें। साथ ही एक बात का और ध्यान रखें कि लैपटॉप या फोन चलाने वक़्त अपनी पलकों को नियमित रूप से झपकाते रहें जिससे आपकी आँखों में दानापन न आए।

उपरोक्त सावधानियों से आप अपनी आंखों की अच्छी तरह देखभाल कर सकते हैं और यदि आंखों में आपके ज्यादा तकलीफ या संक्रमण होता है तो आंखों के विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें और उनसे अपनी आंखों की जांच अवश्य कराएं।

डॉक्टर सुनील चतुर्वेदी (MS, MBBS)
स्वास्तिक आई हॉस्पिटल।
जगत पैलेस
देहरादून रोड ऋषिकेश।
संपर्क-8979006363
8218639710,80135-7967666.

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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