मनोरंजनसाहित्य सृजन।

रजनीश तिवारी की दो कविताएं।

रजनीश तिवारी की दो कविताएं!

(१)
क्यों जीवन से है अलग – थलग ,
तू दिल को खिलाना सीख तो ले।
जीवन में मिलें ना पुष्प अगर ,
कांटों से निभाना सीख तो ले।

जर्जर जीवन से निराश न हो,
दु:ख पीछे सुख भी मिलता है।
हो अंधकार चाहे कितना घना ,
अनायास उजाला खिलता है।
जीवन प्रसन्न हो जाएगा ,
बस तू मुस्काना सीख तो ले।
जीवन में मिलें ना पुष्प अगर ,
कांटों से निभाना सीख तो ले।

मत बैठ होकर नि:शब्द यों तू,
जीवन – संगीत में घुल जाए तू।
यह दुनिया एक तराजू है,
अपने ही मोल पे तुल जा तू।
खामोशी को तू कर दे विदा,
खुशियों का तराना सीख तो ले।

जीवन में मिलें ना पुष्प अगर ,
कांटों से निभाना सीख तो ले।

जब आएं हैं मंच पे जीवन के ,
तब अभिनय तो करना होगा।
पूरी भूमिका अपनी निभा ,
जीकर फिर मरना ही होगा ।
आनंद के हैं ठहराव कई,
तू आना-जाना सीख तो ले।

जीवन में मिलें ना पुष्प अगर ,
कांटों से निभाना सीख तो ले।
( २)

लोग पूछ लेते हैं,
क्यों चिल्ला रहे हो?
भीड़ बहरी है ,
किसको कविता सुना रहे हो?
तब मैं सोचता हूं ,
क्यों न इन पुतलों की तरह ,
इस नर्क में मदहोश हो जाऊं ?
ताक पर रख दूं लेखनी ,
मैं भी भीड़ में खामोश हो जाऊं ।
पर डरता हूं ऐसे सन्नाटे से ।
हां , मैं डरता हूं समाज को ,
चुभ रहे भ्रष्टाचार के कांटे से।
जिसके चुभने से भारत की
जनता चिल्ला रही है।
पर,जाने क्यों ,
स्वयं अपनी आवाज खोती जा रही है।
कवि तो एक प्रहरी है,
हमेशा ही सोते को जगाएगा।
और जब देश के आंसू बहेंगे,
अपनी स्याही सतत बहाएगा.
है,एक रास्ता ,एक सूरत है।
मुझे बस अपनी आवाज में
मिलने वाली आवाजों
की जरूरत है।
विश्वास रखो ।
एक होकर हम अराजकता की
खाई को पाट देंगे।
मिलकर बोलेंगे हम ,
तो अवश्य ही इस सन्नाटे को
काट देंगे।
सोचो,
हमें खोखला कर रहे हैं ऐसे ही
सन्नाटे ।
आओ हम आवाज उठाएं,
सन्नाटा हम क्यो बांटे?


कवि रजनीश तिवारी,विशाखापट्टनम।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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