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*श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर निबंध प्रतियोगिता भाषण प्रतियोगिता कला प्रतियोगिता का हुआ आयोजन*

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश।

आज श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर निबंध प्रतियोगिता भाषण प्रतियोगिता कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य नेताजी के विचारों और उनकी भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाना था।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य मेजर गोविंद सिंह रावत ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी थे, इनकी विचारधारा गांधी जी के अहिंसावादी विरोध से बिलकुल अलग थी। इनका विश्वास था कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हिन्सात्मक विरोध सही है।

वरिष्ठ एवं प्रवक्ता यमुना प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी में अपना योगदान देने के लिए इन्होनें विख्यात आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी। इनके भाषण हमेशा देशप्रेम की भावना को बढ़ाते थे। उनके जीवन और उनके भाषणों से कुछ अंश यहाँ पर प्रस्तुत है। उम्मीद हैं इन्हे पढ़कर आपमें भी देशप्रेम की भावना जागृत हो जाएगी।

आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके।

जब हम खड़े हों, तब आज़ाद हिन्द फौज को एक ग्रेनाइट की दीवार के समान होना होगा; जब हम आगे बढ़ें, तब आज़ाद हिन्द फौज को एक स्ट्रीमरोलर के समान होना

तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।

इतिहास में कभी भी विचार-विमर्श से कोई ठोस परवर्तन हासिल नहीं किया गया हैं ।

याद रखिये कि सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना हैं ।

“स्वतंत्रता दी नहीं जाती है – यह ली जाती है।”

सैनिक जो हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहते हैं, जो हमेशा अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं, वे अजेय होते हैं।
जैसे महान विचारों पर छात्र छात्राओं ने निबंध भाषण प्रतियोगिता मैं बढ़-चढ़कर भाग लिया इस अवसर पर प्रवक्ता शिव प्रसाद बहुगुणा ,Nss अधिकारी जयकृत रावत,विनीत सिंघल,डॉ सुनील दत्त थपलियाल, रंजन अंथवाल, नवीन मेंदोला ,भगवती जोशी, नीलम जोशी रेखा बेस्ट सुनीता संजीव कुमार विकास नेगी ,विवेक शर्मा अजय ,प्रवीण रावत,नितिन जोशी ,हरि सिंह राजीव शर्मा आदि उपस्थित थे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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