ऋषिकेश

*’नमस्कार’ शान्ति की ओर पहला कदम-विश्व नमस्कार दिवस पर विशेष*

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश।

*ऋषिकेश, 21 नवंबर।* आज विश्व नमस्कार दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’शक्ति का उपयोग करने के बजाय अभिवादन संस्कार के माध्यम से संघर्षों को हल करना ही आज के दिन का उद्देश्य है।’’ शांति को बढ़ाने के लिये व्यक्तिगत प्रयासों के महत्व की अभिव्यक्ति का संदेश देता है विश्व नमस्कार दिवस। आज के दिन हर व्यक्ति कोशिश करे कि कम से कम दस लोगों का अभिवादन कर आपसी संघर्षों को हल करने तथा शान्ति को बढ़ाने में अपना योगदान प्रदान करे।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हाथ जोड़कर नमस्कार करने का तात्पर्य संस्कार, सम्मान, संवाद और शान्ति की स्थापना से है। चेहरे पर मुस्कान के साथ हाथ जोड़कर व सिर झुकाकर अभिवादन करना ही तो भारत की संस्कृति है, जो दर्शाती है कि हमारा व्यवहार दूसरों के प्रति मित्रवत है, हम शान्तिपूर्ण वार्तालाप के लिये तैयार है तथा हम प्रेम के साथ दूसरों से जुड़ना चाहते हैं।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ’नमस्कार’ केवल एक शब्द नहीं बल्कि इसमें पूरी दुनिया को प्यार और अपनत्व के साथ जोड़ने की शक्ति है। आज का दिन आपसी मतभेदों को भूलाकर शान्ति के साथ आगे बढने का अवसर देता है। ’नमस्कार’ में अद्भुत शक्ति है, अगर हम किसी अजनबी का अभिवादन करें तो उनका हृदय अपार श्रद्धा और प्रेम से भर जाता है। मुझे तो लगता है दुनिया में शान्तिपूर्ण बदलाव का मार्ग प्रशस्त करता है नमस्कार। वैसे तो लोग चमत्कार को नमस्कार करते है, लेकिन नमस्कार के चमत्कार को भूल जाते है परन्तु कोरोना ने हमें बता दिया नमस्कार को चमत्कार।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि कोरोना वायरस ने भारतीय संस्कृति की अभिवादन पद्धति को वैश्विक स्तर पर साझा करने और उसके महत्व को समझने का एक अवसर दिया है। मेरा मानना है कि ’नमस्कार’ शान्ति और सद्भावना का प्रतीक है, अगर एक व्यक्ति दस व्यक्तियों को नमस्कार करता है तो यह चेन (चक्र) वैश्विक स्तर पर शान्ति की स्थापना का एक माध्यम बन सकती है। जिस प्रकार आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अंधा बना सकती है उसी प्रकार दोनों हाथ जोड़कर किया गया अभिवादन पूरी दुनिया को अपना बना सकता है। आईये संकल्प लें कि प्रतिदिन कम से कम दस लोगों का दिल से अभिवादन करेंगे। हमारा यह छोटा सा प्रयास वैश्विक शान्ति की स्थापना में अद्भुत योगदान दे सकता है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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