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*छठ पर्व सिखाता है जिसका “अस्त” होता है उसका “उदय” भी होता है*

त्रिवेणी घाट पर व्रती महिलाएं सपरिवार पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर तीसरे दिन के व्रत का समापन किया।

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश।
महापर्व छठ के तीसरे दिन डूबते सूरज को व्रतियों ने अर्घ्य दिया।
दुनिया कहती है जिसका उदय होता है उसका अस्त होना तय है। लेकिन एकमात्र छठ पर्व हमें सिखाता है कि जो अस्त होता है उसका उदय होता है।

महापर्व छठ की आस्था व धूम पूरे संसार में फैली है! चार दिवसीय छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते सूरज को व्रतियों ने अर्घ्य देकर मंगल कामना की मांग की। नए नए कपड़े पहन कर छठ घाटों पर बच्चों ने पटाखे छोड़ कर छठ पूजा एवं सूर्य उपासना का उत्सव मनाया ।भगवान सूर्य की उपासना के महापर्व छठ के तीसरे दिन नदी घाटों तालाबों अन्य जलाशयों में अरग देने वर्तियों का सैलाब उमड़ पड़ा। स्थल डूबते सूर्य को अर्घ देकर व्रतियों ने अपने समाज की खुशहाली की प्रार्थना किया। इस बार जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी पूजा में शामिल नहीं हुए।

शासन प्रशासन द्वारा कोरोनावायरस के चलते त्रिवेणी घाट पर छठ पूजा के लिए मनाही थी। परंतु कोरोनावायरस आस्था पर हल्का पड़ा और लोग कोरोनावायरस को भूलकर त्रिवेणी घाट पर गंगा पूजा करने के लिए पहुंच गए। हालांकि इस बार त्रिवेणी घाट पर एक चौथाई भीड़ ही पहुंच पाई क्योंकि प्रशासन की तरफ से सख्त मनाई थी।

लोगों ने पूजा के लिए जो वेदी बनाई गई थी उसे प्रशासन ने तोड़ दिया था। आपको बता दें कि लोक आस्था का पर्व इसलिए तो अनूठा है कि इसमें प्रकृति की पूजा प्राकृतिक चीजों के व्यापक प्रयोग की कुशलता, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्वच्छता, संस्कृति भाईचारा और आस्था का बेजोड़ मेल है।

आज शुक्रवार 20 नवंबर को छात्रवृत्ति डूबते सूरज को अर्घ देकर अपने अपने घर और पर पहुंचकर रात्रि भर भजन कीर्तन करेंगे। सुबह वही घाट पर उसी जगह पर जाकर उगते हुए सूरज को यानि सप्तमी के दिन अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगे।


त्रिवेणी घाट पर मनाही के बाद दयानंद घाट पर लोगों का इस बार भीड़ ज्यादा रहा वहां लोगों ने गंगा तट पर जाकर सपरिवार पूजा अर्चना किया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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