ऋषिकेशधर्म-कर्म

*भगवान श्री कृष्ण द्वारा प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा का सार्थक संदेश- गोवर्धन पूजा*

देवभूमि जेके न्यूज, ऋषिकेश।

श्री जयराम आश्रम ऋषिकेश 15 नवंबर 2020 समस्त प्राणियों का जीवन प्रकृति पर निर्भर है, इसलिए प्रकृति को परमात्मा का स्वरूप कहा गया है!
यह बात जयराम संस्थाओं के पीठाधीश्वर ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी जी ने गोवर्धन पूजा के अवसर पर कही।
गोवर्धन पूजा को गोपाल कृष्ण द्वारा दिया गया गोरक्षा का संदेश बताया- भगवान गोपाल कृष्ण को गाय व गोपियां अत्यंत प्रिय थी इसलिए योगेश्वर कृष्ण ने प्रकृति एवं समाज के संवर्धन के लिए प्रकृति पूजा स्वयं करके समाज को सार्थक संदेश दिया।


भगवान ने इंद्र का अहंकार मर्दन करके गोकुल वासियों को शरणागत करके भगवान के माध्यम से सबकी रक्षा की, जिससे यह संदेश दिया कि जो भगवान के शरणागत होते हैं उनकी रक्षा एवं मुक्ति का मार्ग स्वयं भगवान प्रदान करते हैं। भगवान ने गीता में भी कहा है “सर्वधर्मान परित्यज्य मामेकमं शरणं व्रज”! ब्रह्मचारी जी ने गाय एवं कन्याओं पर राजनीतिक दलों द्वारा राजनीति किए जाने पर स्पष्ट बताया कि इससे ना उन राजनीतिक दलों का कल्याण होगा नहीं समाज का!
उन्होंने सब का आह्वान किया कि जो लोग भगवान कृष्ण को मानते हैं धर्म में आस्था रखते हैं उन्हें प्रकृति की रक्षा के लिए और कन्या के संवर्धन के लिए सतत प्रयास करना चाहिए ।इसी में समाज का कल्याण निहित है। उन्होंने कहा कि आज की कन्या कल की मां है इस तरह गाय को भी मां का दर्जा समाज में प्राप्त है। प्रकृति भी माता की तरह हमारी रक्षा करती है स्वस्थ समाज के लिए हर स्तर पर जन जन को प्रयास करने का आह्वान किया और कहा कि गंगा को एक सामान्य नदी न मानकर गंगा को “गंगे तव दरृशनात् मुक्ति:” के भाव से उसे प्रदूषित होने से बचाना चाहिए। उन्होंने लोगों से लगातार उपेक्षा के भाव दर्शाने पर गहरी चिंता व्यक्त की और स्पष्ट कहा कि इन तीनों को अब सरकार की कृपा पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए!
इस अवसर पर नगर निगम मेयर अनीता मंगाई, विनोद अग्रवाल, गंगाराम आडवाणी, अशोक शर्मा, दीप शर्मा, जयेंद्र रमोला, शिव सहगल, एमसी त्रिवेदी, संजय शास्त्री, अरविंद जैन, सुनील प्रभाकर, सूरज प्रभाकर, प्रदीप शर्मा, परीक्षित मेहरा, पंकज शर्मा, विनय उनियाल आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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