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*बाबा का केदारनाथ धाम में बर्फबारी के बीच तपस्या करता हुआ वीडियो वायरल हो रहा है.जिसको 5 लाख से ज़्यादा लोग देख चुके हैं और यह वीडियो लगातार ट्रेंड कर रहा है-आप भी देंखे यह अद्भूत विडियो*

देवभूमि जे के न्यूज़।
देहरादून, विगत दो दिनों से सोशल मीडिया में एक बाबा का केदारनाथ धाम में बर्फबारी के बीच तपस्या करता हुआ वीडियो वायरल हो रहा है.जिसको 5 लाख से ज़्यादा लोग देख चुके हैं और यह वीडियो लगातार ट्रेंड कर रहा है।


उत्तराखंड में सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें एक बाबा केदारनाथ मंदिर के आगे बर्फबारी के बीच तपस्या करते हुए नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने भी बाबा के इस वीडियो को ट्वीटर पर शेयर किया है.

दरअसल, सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर तपस्या करते बाबा की यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. फेसबुक पर कई पेजों ने इस वीडियो को एक ही कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया है ‘केदारनाथ धाम में सुबह के 3 बजे माइनस 10 डिग्री तापमान में हिमपात हो रहा है. हिमालयन योगी..भगवान भोले शंकर के ध्यान और तपस्या में लीन है.’

वहीं, इसके अलावा इंस्टाग्राम और ट्वीटर पर भी यह वीडियो बीते 24 घंटों से छाया हुआ है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने भी इस वीडियो को ट्वीट के जरिए शेयर करते हुए लिखा है ‘यूं ही नहीं उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है.’ फिलहाल, इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह वीडियो कब का है.

अब इस जिज्ञासा का समाधान हमारे खोजी पत्रकारों द्वारा किया गया, उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्र कई सिद्ध योगियों और साधकों के लिए विश्व विख्यात है, और किसी योगी को खोजना अत्यंत कठिन कार्य है, क्योंकि यह सिद्ध योगी बहुत कम ही सामने आते हैं या अपने बारे में कुछ बताते हैं। परंतु हमारे खोजी पत्रकारों का अथक परिश्रम रंग लाया और उनकी खोज करने पर यह तथ्य सामने आया कि यह वीडियो वेद निकेतन धाम आश्रम (स्वर्गाश्रम) के परमाध्यक्ष स्वामी विजयानन्द सरस्वती का है। विजयानन्द सरस्वती एक जाने माने हट योगी हैं और हर वर्ष कार्तिक मास में केदारनाथ में कठोर हट योग करते हैं। इस माह भी जब वह साधना में लीन थे तब वहाँ मौजूद किसी पर्यटक ने उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिया, जहाँ यह वीडियो रातों रात वायरल होकर ट्रेंड कर रहा है।

विजयानन्द सरस्वती निरंजनी अखाड़े के सिद्ध योगी हैं और ऋषिकेश के विश्व प्रसिद्ध हट योगी विश्व गुरु योगेश्वर मुनिशानंद की परम्परा से हैं, विश्व गुरु मुनिशानंद भी अखंड हट योगी थे और प्रति दिन ब्रह्मवेला में गंगा जी में 108 डुबकियाँ लगाया करते थे, उन्हें अष्टांग योग सिद्ध थे, उन्होंने 105 वर्ष की अवस्था में अपने शरीर का त्याग किया, स्वतंत्र भारत में शायद ही ऐसा कोई योगी होगा जिसने उनका आशीर्वाद प्राप्त ना किया हो। स्वामी विजयानन्द की गुरु माँ और स्वामी विश्व गुरु मुनिशानंद की शिष्या महामंडलेश्वर दिव्यानंद सरस्वती भी एक बहुत प्रषिद्ध महिला हट योगी हैं। ऐसा माना जाता है कि विजयानन्द सरस्वती को कई सिद्धियाँ प्राप्त हैं परंतु स्वामी विजयानन्द बहुत ही सौम्य, सरल एवं शांत प्रकृति के सन्यासी हैं, और किसी भी प्रकार के आडम्बर और सांसारिकता से पूर्णतः विमुख हैं। ऐसी मान्यता है कि लोग अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए उनसे आशीर्वाद लेने आते रहते हैं।
खोजबीन में यह बातें भी पता चली कि स्वामी विजयानन्द सरस्वती ने 10 वर्ष की बाल्यावस्था में ही सन्यास ग्रहण कर लिया था और विश्व गुरु मुनिशानंद से आज्ञा लेने के पश्चात वह दक्षिण भारत के एक विश्वविख्यात संत के आश्रम में रहे और योगिक तथा आध्यात्मिक शिक्षा में पारंगत होने के उपरांत पुनः अपने गुरु के आश्रम में अपनी गुरु माँ की सेवा में आ गए, स्वामी विजयानन्द सरस्वती योगिक और आध्यात्मिक विषयो में तो पारंगत हैं ही साथ ही साथ वह परंपरागत व्यावसायिक शिक्षा में भी मास्टर्स हैं, विजयानन्द सरस्वती कई भाषाओं के ज्ञाता हैं उनसे बातचीत करने पर और उनकी भाषा की पकड़ से यह पता ही नहीं चलता कि उनकी मातृ भाषा कौन सी है हिन्दी, अंग्रजी, संस्कृत, कन्नड़, तमिल, तेलगु, मराठी या की गुजराती । विजयानन्द सम्पूर्ण भारत का भर्मण कर चुके हैं और कई सिद्ध सन्यासियों के सानिध्य में रहे हैं। बद्री केदार क्षेत्र की वह कई बार पद यात्रा कर चुके हैं, यह मात्र संयोग ही था कि इस बार उन्हें साधना करते हुए एक पर्यटक ने देख लिया अन्यथा इस सिद्ध हट योगी के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं मिलती और सामान्य जन विजयानन्द सरस्वती के बारे में ना ही जान पाता और ना ही इस महान योगी का आशीर्वाद ही प्राप्त कर पाता। ऐसे ही जैसे हिमालयी ब्रह्म कमल की सुंदरता और सुगन्ध बिरले ही लोगों को प्राप्त होती है। धन्य है उत्तराखंड और धन्य है यहाँ की योग भूमि।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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