ऋषिकेशधर्म-कर्मशहर में खास

*अध्यात्म से ही “वसुधैव कुटुंब” को मिलेगी असली पहचान*

देवभूमि जे के न्यूज़।

ऋषिकेश गीता भवन में तीन दिवसीय महर्षि अरविंद फाउंडेशन द्वारा आयोजित अध्यात्मिक मानव कल्याण विश्व शांति हेतु आयोजित कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के निदेशक अनुराग छाबड़ा एवं सुशांत मुनि जी द्वारा तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया इस समय न सिर्फ कोरोनावायरस जैसी महामारी से जूझ रही है बल्कि आर्थिक संकट और अशांति ने भी हर तरफ भय का माहौल बना दिया है।
इस बीच महर्षि अरविंद फाउंडेशन फाउंडेशन ने गीता भवन नंबर 5 में अध्यात्म, विज्ञान, विश्व शांति को लेकर 3 दिन के सेमिनार के जरिए मानव जीवन के कल्याण के लिए नया रास्ता देने का प्रयास किया है। इस सेमिनार में देश भर के बुद्धिजीवी के साथ-साथ साधु-संतों ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता की और तनाव से मुक्त जीवन, बेहतर शिक्षा, आर्थिक तरक्की विश्व में शांति लाने जैसे गंभीर मुद्दों पर अपने अपने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान अध्यात्म और विज्ञान के जरिए मानवता के कल्याण पर भी मंथन हुआ तो इसे पूरे विश्व के कल्याण के लिए भी कारगर साबित करने का दावा किया गया है।
महर्षि अरविंद फाउंडेशन के सेमिनार में पहुंचे बुद्धिजीवी और साधु-संतों ने कहा कि अध्यात्म के मार्ग पर चलकर ही ना सिर्फ मानवता का कल्याण किया जा सकता है बल्कि जातिवाद धर्म हिंसा भेदभाव जैसे ज्वलंत मुद्दों पर शर्तिया अंकुश लगाया जा सकता है। जब इन पर विराम लगेगा तभी वसुधैव कुटुंबकम के तौर पर पूरी पूरी दुनिया को एक नई दिशा मिलेगी।

जीवन जीने की कला है अध्यात्म-

अध्यात्म को लेकर बुद्धिजीवियों के साथ-साथ साधु संतों ने खूब मंथन किया। इसके बाद निर्णायक मंडल के प्रमुख महामंडलेश्वर अभिषेक चेतन गिरी महाराज ने कहा कि जीवन का प्रत्येक क्षेत्र अध्यात्म से परिपूर्ण है इसे यूं भी कह सकते हैं कि अध्यात्म जीवन जीने की कला है साथ ही कहा कि आत्मा अनुसंधान का नाम ही आध्यात्मिक स्वरूप, आत्ममंथन और आत्मउत्कर्ष भी अध्यात्म है।

मानव कल्याण में विज्ञान की भी अहम भूमिका-

महर्षि अरविंद फाउंडेशन के सेमिनार में दूसरे दिन विज्ञान पर चर्चा हुई!
विज्ञान क्या है? और इसका उपयोग जीवन में कितना सार्थक है?
इस दौरान मंथन के बाद निकल कर सामने आया कि- “विज्ञान संसार समाज और राष्ट्र के मंगलमय होने और कल्याण तक का साधन है! जबकि निर्णायक मंडल ने एक स्वर में कहा कि विज्ञान ने मानव जीवन को गौरवान्वित किया है! लेकिन इसके पीछे अध्यात्म का भी बड़ा योगदान है।
विश्व शांति आने का सही और मार्ग तरीका है वैदिक पद्धति-

तीसरे दिन विश्व शांति को लेकर मंथन हुआ! इस दौरान दिन के दोनों सत्रों में बुद्धिजीवियों के साथ-साथ साधु-संतों ने अपने विचार रखे।
अंततः जो निर्णायक विचार निकला-
वैदिक पद्धति ही आज की समस्याओं का समाधान है! आज इसे अधिक से अधिक प्रयोग में लाने की जरूरत है। क्योंकि वैदिक संस्कृति ही मानव जीवन की संस्कृति है यह किसी जाति, पंथ, मजहब, स्त्री और पुरुष में भेद नहीं करती। यकीनन यह विश्व के सभी जन चेतना का एक समान स्वरूप से आलिंगन करती है।

इसी वैदिक पद्धति के दम पर समाज राष्ट्र और पूरी दुनिया में शांति स्थापित की जा सकती है। क्योंकि आज पूरा मानवता अशांति के दौर से गुजर रहा है इसलिए शांति सभी के जीवन में बेहद जरूरी है।
हम लोगों ने जो तीन दिवसीय मंथन किया है और जो हमने यहां पाया है वह बेहद संतोषजनक रहा। अगला सम्मेलन अक्टूबर 21 में श्रीलंका में आयोजित होगा जिसमें देश विदेश के बुद्धिजीवी मंथन करेंगे और हमारा प्रयास रहेगा कि एक शांतिपूर्ण हिंद राष्ट्र की स्थापना परिकल्पना को साकार हम करेंगे क्योंकि हमारा यह मंथन हिंदू राष्ट्र की स्थापना यानी की वसुधैव कुटुंबकम का भाव ही हमारा लक्ष्य है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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