ऋषिकेशक्राइम

*चंद्रेश्वर नगर धोबी घाट में रहने वाले धर्म वीर पुत्र रामभरोसे ने फांसी लगाकर की आत्महत्या*

भाई की बेटी को कुछ दिनों से ससुराल वाले कर रहे थे परेशान। इसी के चलते लगाई फांसी। मौके से सुसाइड नोट बरामद। भाई की बेटी के ससुरालियों पर लगाया मौत की जिम्मेदारी का आरोप ।पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को लिया कब्जे में ।पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा ऋषिकेश एम्स। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल।

देवभूमि जे के न्यूज़।
ऋषिकेश धोबी घाट चंद्रेश्वर नगर निवासी महेंद्र शर्मा पुत्र रामभरोसे शर्मा अपने परिवार सहित धोबी घाट में रहते हैं, 6 महीने पहले महेंद्र शर्मा ने अपनी पुत्री की शादी बनखंडी निवासी अमन पुत्र विनोद से की थी ।अमन बैंक में कार्य करता है। शादी के 1 महीने बाद ही अमन ने महेंद्र शर्मा की पुत्री को परेशान करना शुरू कर दिया। वही अमन के परिवार वाले लगातार दहेज की मांग करते रहे। दहेज न मिलने पर लड़की को प्रताड़ित कर रहे थे। पिछले 1 महीने से लड़की अपने मायके में ही रह रही थी। देर रात्रि अमन पुत्र विनोद अपनी ससुराल आया और उसने महेंद्र शर्मा के भाई धर्मवीर से अकेले में बात करने के लिए बुलाया। काफी देर तक बात करने के बाद अमन चला गया ।उसके बाद धर्मवीर ने अपना कमरा बंद कर लिया। सुबह जब परिवार वाले उठे तो देखा कि धर्मवीर का कमरा बंद है। जंगले से झांक कर देखा कि धर्मवीर में फांसी लगाई हुई है ।तुरंत ही महेंद्र शर्मा ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को फोन पर दी। कंट्रोल रूम से ऋषिकेश कोतवाली को मामले के बारे में अवगत कराया गया। थाने से सत्येंद्र भाटी मैं फोर्स के मौके पर पहुंचे। बड़ी मुश्किल से कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा गया ।मौके से जो सुसाइड नोट बरामद हुआ उसमें लिखा हुआ था कि मेरी मौत का जिम्मेदार सात आठ लोगों के नाम हैं यह लोग हैं। पुलिस ने सुसाइड नोट अपने कब्जे में ले लिया वहीं सबको पंचनामा करने के बादपोस्टमार्टम हेतु एम्स में ले जाया जा रहा है। वहीं मृतक के भाई और भतीजी ने अपने ससुराल के लोगों पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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