अजब-गजब!देहरादूनधर्म-कर्म

*उत्तराखंड देव दर्शन-देहरादून टपकेश्वर महादेव शिवलिंग पर पहले साक्षात प्रकृति दूध से अभिषेक करती थी, फिर दूध पानी कैसे हुआ? पढ़ें पूरी कहानी*

देवभूमि जे के न्यूज।
उत्तराखंड में कण-कण में साक्षात देवी देवता निवास करते हैं। मुझे देहरादून स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ वहां स्वयंभू शिव के दर्शन कर मन गदगद हो गया। टपकेश्वर महादेव के विषय में अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार कब वहां शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए अभी तक किसी को अस्पष्ट ज्ञान नहीं है। आइए टपकेश्वर महादेव के विषय में हम जाने और एक बार आप भी टपकेश्वर महादेव का दर्शन अवश्य करें जैसा की सर्वविदित है कि देवों की भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल टपकेश्वर मंदिर स्थित है। यह पवित्र धार्मिक स्थल देहरादून के बस स्टैंड से लगभग 5.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तमसा नदी के तट पर स्थित टपकेश्वर मंदिर को सिद्धपीठ के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां एक प्राकृतिक गुफा में पवित्र शिवलिंग विराजमान है।

कहा जाता है कि गुफा के अंदर स्थित इस पवित्र शिवलिंग पर हर समय पानी की बूंदे टपकती रहती हैं, यही कारण है कि इस धार्मिक स्थल का नाम टपकेश्वर मंदिर पड़ गया। टपकेश्वर मंदिर को गुरू द्रोणाचार्य जी की तपस्थली भी माना जाता है।टपकेश्वर महादेव मंदिर का कब और कैसे हुए था, यह अपने आप में बड़ा रहस्य है। स्थानीय लोगों का मानना हैं कि गुफा के अंदर शिवलिंग स्वयं से प्रकट हुआ है, वहीं कई लोगों का मानना है कि यह पूरा मंदिर ही स्वर्ग से उतरा है। टपकेश्वर महादेव मंदिर में एक अन्य शिवलिंग भी है, जो कि पूरी तरह रुद्राक्ष से जड़ा हुआ।

मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पूर्व गुरु द्रोणाचार्य अनेक स्थानों का भ्रमण करते हुए हिमालय पहुंचे। जहां उन्होंने एक ऋषिराज से पूछा कि उन्हें भगवान शंकर के दर्शन कहां होंगे। मुनि ने उन्हें गंगा और यमुना की जलधारा के बीच बहने वाली तमसा (देवधारा) नदी के पास गुफा में जाने का मार्ग बताते हुए कहा कि यहीं स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। जब द्रोणाचार्य यहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि शेर और हिरन आपसी बैर भूल एक ही घाट पर पानी पी रहे थे।


उन्होंने घोर तपस्या कर शिव के दर्शन किए तो उन्होंने शिव से धनुर्विद्या का ज्ञान मांगा। कहा जाता है कि भगवान शिव रोज प्रकट होते और द्रोण को धनुर्विद्या का पाठ पढ़ाते। द्रोण पुत्र अश्वत्थामा की जन्मस्थली भी यही है। उन्होंने भी यहां छह माह तक एक पैर पर खड़े होकर कठोर साधना की थी। एक और मान्यता है कि टपकेश्वर के स्वयं-भू शिवलिंग में द्वापर युग में दूध टपकता था, जो कलयुग में पानी में बदल गया। आज भी शिवलिंग के ऊपर निरंतर जल टपकता रहता है। हर साल फागुन में महाशिवरात्रि और श्रावण मास की शिवरात्रि पर टपकेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। यहां पर ध्यान गुफा समेत अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

यहां आने वाले श्रद्धालु मुख्य शिवलिंग के साथ-साथ दुसरे शिवलिंग के भी दर्शन कर सकते हैं। शिवलिंग के साथ-साथ टपकेश्वर महादेव मंदिर में सभी देवी देवताओं की प्रतिमा भी है। यहां भगवान हनुमान की एक विशाल मूर्ति भी है। इसके अलावा परिसर में माता वैष्णों का एक मंदिर भी बनाया गया है। इसमें एक प्राकृतिक गुफा है जो मां वैष्णों देवी स्थल का अनुभूति कराती है। यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सावन महीने और शिवरात्रि के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु विशेषतौर पर यहां आते हैं।

पौराणिक कथा

कथा के अनुसार टपकेश्वर मंदिर देवताओं का निवास स्थान है। यहीं पर देवता भगवान शिव का ध्यान किया करते थे। यहां स्थित पवित्र गुफा में भगवान शिव ने देवताओं को देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे। इसके बाद भगवान शिव ने ऋषियों को दर्शन दिए। एक अन्य कथा के अनुसार यह वही स्थान है जहां पर कौरवों व पाडवों के गुरू द्रोणाचार्य ने भगवान शिव की तपस्या करने के बाद धनुविद्या का ज्ञान प्राप्त किया था। इसके अलावा गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वश्थामा ने इसी स्थान पर छः महीने तक एक पांव पर खड़े होकर भगवान शिव की तपस्या की थी।

अश्वश्थामा की तपस्या पूर्णमासी के दिन पूरी हुई और शिवलिंग पर दुध की धरा बहने लगी। अश्वश्थामा ने इसी दूध से अपनी भूख और प्यास मिटाई। इसी दौरान भगवान शिव ने अश्वश्थामा को अमरता का वरदान दिया। कलयुग में दुध का गलत इस्तेमाल होने के कारण भगवान शिव ने दूध को पानी में बदल दिया। तब से लेकर आज तक शिवलिंग पर पानी की बूंदे गिर रही हैं।

यह धार्मिक स्थल देहरादून के बस स्टैंड से लगभग 5.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस दूरी को श्रद्धालु टैक्सी या अन्य किसी वहां की मदद से तय कर सकते हैं। देहरादून आने के लिए देश के किसी भी हिस्से से सड़क, हवाई और रेल यातायात सुलभ है। देहरादून में हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन मौजूद है। देहरादून रेलवे स्टेशन दिल्ली, लखनऊ, इलाहाबाद, मुंबई, कोलकाता सहित देश के कई प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। देहरादून उत्तराखंड राज्य परिवहन की बसों द्वारा दिल्ली, शिमला, हरिद्वार, ऋषिकेश, आगरा और मसूरी सहित कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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