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*हमारे जीवन रूपी गाड़ी की दिशा क्या है?*

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश।

एक व्यक्ति मरने के बाद जब यमराज के दरबार में पहुंचा। जब उसका लेखा-जोखा होने लगा तो उसने बीच में यमराज से कहा कि –
“महाराज मुझे जो भी सजा दें, स्वर्ग या नर्क में भेजें इसके लिए मैं सहर्ष तैयार हूं”। परंतु एक विनती है- कृपा करके परम पिता परमेश्वर से 1 मिनट के लिए मुलाकात करवा दीजिए आपकी बडी कृपा होगी। उसके बाद आप जो भी सजा देंगे, मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी। उस व्यक्ति की बात सुनकर यमराज आश्चर्यचकित हो गए बोले- “ऐसा कदापि नहीं हो सकता ।पहले भी तुम्हारी तरह एक मनुष्य ने प्रभु दर्शन करने की अभिलाषा कि, हमने प्रभु से अनुनय विनय करके जब उसके सामने प्रभु को लाए, तो वह उनका पैर पकड़ कर बैठ गया। छोड़े ही नहीं बड़ी मुश्किल से भगवान को उस से छुड़ाया गया ।तुम ऐसी इच्छा मन में ना लाओ तो अच्छा है ।
“मनुष्य बोला नहीं मेरा इरादा ऐसा कुछ नहीं है। आप प्रभु को बुलाइए दूर से मैं केवल एक प्रश्न पूछ लूंगा, उसके बाद आप मुझे जो भी सजा देंगे मैं सहर्ष स्वीकार कर लूंगा ।
यमराज ने साफ शब्दों में जब इंकार किया किया तो वह व्यक्ति झगड़ा पर उतारू हो गया, शोर मचाने लगा कोलाहल सुनकर प्रभु स्वयं ही बाहर आए यमराज सहित सारे दरबारी विस्मित होकर प्रभु को देखने लगे- “प्रभु उस व्यक्ति की तरफ उन्मुख होकर बोले
” पूछो क्या पूछना चाहते हो ?
” व्यक्ति बोला प्रभु मैं अभी-अभी धरती से यहां पर आया हूं। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है, मनुष्य ही मनुष्य का दुश्मन बनता जा रहा है !लूट हत्या, बलात्कार ,रिश्ते -नाते , चोरी -डकैती ,एक दूसरे से आगे निकलने की होड़, पिता-पुत्र ,भाई -भाई, पति- पत्नी आपस में ही एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं ।धरती पर त्राहि -त्राहि मची हुई है ।
“ज्ञानी लोग अपने ज्ञान का उपयोग विनाश के लिए करने में लगे हैं”
” वैज्ञानिक जीवो के विनाश के लिए अनेकों प्रकार के आविष्कार करके उन्हें समाप्ति की तरफ अग्रसर कर रहे हैं।
” प्रभु मैंने सुना है जब अधर्म का बोलबाला होता है, तब आप धरती पर अवतार लेते हैं। परंतु आप यहां मजे से सयन कर रहे हैं, मुस्कुरा रहे हैं ।और धरती का अंत होने वाला है। आप कब अवतार लेंगे ? आप कब अवतार लेंगे? “अपनी बात को समाप्त कर मनुष्य चुपचाप प्रभु को देखने लगा, कुछ देर बाद प्रभु बोले –
“सुनो मैं परमात्मा हूं ,मैंने अपने ही अंश आत्मा को पंचतत्व-
1 आकाश 2अग्नि 3पृथ्वी 4जल 5वायु का शरीर बनाकर रोज ही प्रत्येक मिनट पर अपने अवतार के रूप में भेज रहा हूं।
” जब परमात्मा रूपी आत्मा पृथ्वी पर अवतरित होती है, तो वह निश्चल अपराध लोभ शोक मोह से दूर रहती है ।परंतु जो उसके इर्द-गिर्द रहते हैं जिनके ऊपर यह दायित्व है, कि उसे सही रास्ता दिखाएं, वहीं उसे पथभ्रष्ट कर देते हैं। मैंने सभी जीवो में श्रेष्ठ मनुष्य को बनाया है, बल- बुद्धि- शक्ल, सभी लक्षणों से युक्त सभी गुणों से परिपूर्ण बनाया। परंतु वह अपने गुणों उपयोग विकास की बजाय विनाश की तरफ अग्रसर कर रहा है। अन्य जीवों की सुरक्षा की बजाए ,अपने सहित सभी का बुरा करने में लगा है ।तुम स्वयं अपना उदाहरण लो धरती पर तुम पूरे जीवन दूसरे की बुराई देखते रहे, कभी कोई सार्थक पहल नहीं किया। “मेरे अवतार तो हर पल, हर क्षण हो रहा है”।
परंतु इस निश्चल शरीर आत्मा को कौन गंदा कर रहा है?
कौन इसकी जिम्मेदारी लेगा। “मनुष्य स्वयं इसका कारण है “।
“सुनकर प्रभु की वाणी वह मनुष्य निरुत्तर हो गया”। #वास्तव में विचारणीय प्रश्न है कि क्या हम मनुष्यों का जीवन का विनाश कैसे हो, किस प्रकार दूसरे का हक लेने के लिए हम उतावले हो जाते हैं ।आज वैज्ञानिक चाहे वह किसी देश का हो, प्रत्येक देश अपनी आय का एक बहुत बड़ा अंश –
अणु -बम एटम- बम जैविक- बम और ना जाने क्या-क्या बनाने में लगा है। वास्तव में यह बम आत्मरक्षा के लिए बना रहा है ।जिसे अपनी ही जाति से खतरा है ,यानी मनुष्य का मनुष्य से खतरा। और इसके पीछे इसके मूल में है जमीन और धन, प्रत्येक मनुष्य ज्यादा और ज्यादा और ज्यादा की अभिलाषा लिए घूम रहा है। यह धन व जमीन कितनी बेवफा है, इतनी क्रूर है, कि कभी किसी की नहीं हुई ।इतिहास साक्षी है कि मनुष्य के हाथ में जब भी शक्ति आई है ,उसका गलत उपयोग किया गया, विरले ही कोई व्यक्ति इस शक्ति का उपयोग जीवों के हित के लिए इस्तेमाल किया हो।
परंतु जब धन आता है तो महात्मा गांधी जी के अनुसार 15 बुराइयों को लेकर आता है,वह बुराइयां हैं-
1 लोभ 2 चोरी 3 हिंसा 4ईर्ष्या 5 मिथ्या- भाषण
6पाखंड 7 क्रोध 8गर्व 10. अहंकार 11. अविश्वास स्पर्धा 12.वेश्या संसर्ग 13.जुआ14सुरापान और 15.काम
वास्तव में धन कमाने के लिए यदि उपरोक्त बुराइयों को दरकिनार कर जीवन जिया जाए तो वह अजर अमर की तरफ अग्रसर होने लगता है। इतिहास साक्षी है कि जो व्यक्ति इन बुराइयों से दूर रहा वह अमर हो गया। उसकी कृति उसकी रचना को सदैव याद किया जाता है। जब भी उपरोक्त बुराइयों से परे व्यक्ति का नाम आता है तो सिर्फ श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है। वास्तव में “एक बेईमान व्यक्ति एक ईमानदार सेवक चाहता है”
” मूर्ख व्यक्ति तो मूर्खता पूर्वक कोई गलती करता है” तो उसकी गलती तो क्षमा योग्य है ।पर यदि ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान रहते अपराध करता है, तो वह अच्छम्य् है।
“ज्ञानी का अपराध लोक- परलोक दोनों को ही खराब कर देता है”।
यहां इस लोक से मेरा मतलब वर्तमान से परलोक से मेरा मतलब आने वाली पीढ़ी से है, जो आने वाली पीढ़ी है स्वार्थ के वशीभूत हो हम सब अपने कर्तव्यों को भूल रहे हैं। हम सब इतने स्वार्थी हो गए हैं कि अपना मूल सिद्धांत से पथ भ्रष्ट होते जा रहे। पथ भ्रष्ट होकर हम अनाप-शनाप कार्यों की तरफ तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। अनैतिक तरीके से प्रत्येक कार्य को संपादित करने में लगे हैं। शत प्रतिशत लोग सिद्धांत विहीन हो गए हैं।यहां गांधीजी ने मनुष्य के जीवन में 7 बुराइयां बताई थी –
(1) सिद्धांत विहीन राजनीति (2)श्रम विहीन धन-संपत्ति (3 )अंतर आत्मा विहीन विषय भोग या आमोद -प्रमोद (4) चरित्रविहीन ज्ञान *5)नैतिकता विहीन व्यापार (6) मानवता विहिन विज्ञान और (7)त्याग विहीन पूजा -पाठ उपरोक्त बुराइयां जो आज मनुष्य में तेजी से फल-फूल रही है ,आज के तमाम राजनेता कुर्सी हाथ में आते ही नैतिकता मर्यादा कर्तव्यों को दरकिनार कर स्वार्थ के वशीभूत हो ,ओछी लोकप्रियता हासिल करने में लगे हैं ।सत्ता का गुरूर इस कदर हावी हो जाता है कि जिसके लिए उन्होंने इस पद पर उनको बिठाया जाता है। उसकी गरिमा को भूल अपना भला करने लगते हैं। अधिक धन किस प्रकार से आए, यही हथकंडा अख्तियार कर लेते हैं। जिसके कारण जनता में असंतोष की भावना घर कर जाती है जिसके कारण लूट -खसोट शुरू हो जाता है। जब मुखिया भ्रष्ट हो तो उसके मातहत कर्मचारी भी भ्रष्ट हो जाते हैं। जिसके कारण अनेकों समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि-
” हरे लगे ना लगे फिटकरी रंग चोखा हो जाए”
यानी मेहनत ना करें और अधिक से अधिक धन आ जाए ।धन वास्तव में आज जीवन जीने के लिए नितांत आवश्यक है। परंतु धन जो बिना परिश्रम के आए नैतिकता को ताक पर रखकर धन घर में लाना अपने व परिवार में विकृति को लाना है। जितना सात्विक धन घर में आएगा परिवारिक ढांचा उतनी ही मजबूत होगी. सभी में संतोष की भावना आएगी, और संतोषी सदा सुखी रहता है ।इसके लिए हमें चाहिए कि अपने घर में परिश्रम से कमाया धन ही लाए…….
शेष अगले अंक में……
9411361877 व्हाटसाप नंबर पर अपनी राय से अवश्य हीं अवगत करायें..
-जय कुमार तिवारी ऋषिकेश.

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