धर्म-कर्म

*मेरे यार को कैसे बर्दाश्त होगा कि कोई मुझे मारे….*पढ़िए धर्म-कर्म में अनोखी कहानी!*

ऊपरवाले की लाठी दिखाई नहीं देती पर वार भयंकर करती है!

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश!

*एक साधु वर्षा के कारण जलमग्न सड़क पर मस्ती में चला जा रहा था। इस साधु ने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबल रहा था तथा दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थी। साधु कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया और भट्ठी को बड़े गौर से देखने लगा। नेक दिल हलवाई ने एक प्याला गरम दूध और कुछ जलेबियां साधु को दे दी। मलंग ने गरम जलेबियां दूध के साथ खाई और फिर हाथों को ऊपर की ओर उठाकर हलवाई के लिऐ प्रार्थना करते हुए चल दिया।*

*साधु बाबा का पेट भर चुका था, अब वह दुनिया के दु:खों से बेपरवाह, जोश से बारिश के गंदले पानी के छींटे उड़ाता चला जा रहा था। वह इस बात से बेखबर था कि एक युवा नवविवाहित जोड़ा भी वर्षा के जल से बचता बचाता उसके पीछे चला आ रहा है। उसने बारिश के गंदले पानी में जोर से लात मार दी और उस कीचड़युक्त पानी से उस युवती के कीमती कपड़े कीचड़ से लथपथ हो गये।*

*उसके पति से यह बात बर्दाश्त नहीं हुई, वह आस्तीन चढ़ाकर आगे बढ़ा और साधु को पकड़ कर कहने लगा- अंधा है क्या? तुमको नज़र नहीं आता कि तेरी इस हरकत से मेरी पत्नी के कपड़े कीचड़ से भर गए? साधु हक्का-बक्का सा खड़ा था। महिला ने आगे बढ़कर अपने पति से साधु को छुड़ाना भी चाहा लेकिन युवक की आंखों में गुस्सा देख वह भी पीछे हो गई।*

*राह चलते राहगीर भी उदासीनता से यह सब दृश्य देख रहे थे। किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि उसे रोक पाते और आख़िर जवानी के नशे मे चूर इस युवक ने एक जोरदार थप्पड़ साधु के चेहरे पर जड़ दिया। बूढ़ा मलंग लड़खड़ाता हुआ कीचड़ में जा पड़ा। फिर वह युवक भुनभुनाते हुए वहां से चल दिया। बूढे साधु ने आकाश की ओर देखा और उसके होठों से निकला- वाह मेरे भगवान, कभी गरम दूध जलेबियां और कभी गरम थप्पड़…. लेकिन तू जो चाहे, मुझे वही मंजूर है।*

*वह युवा जोड़ा अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हो गया। थोड़ी ही दूर चलने के बाद वे अपने घर पहुंच गए। युवक अपनी जेब से चाबी निकाल कर अपनी पत्नी के साथ ऊपर घर की सीढ़ियां चढ़ने लगा। बारिश के कारण सीढ़ियों पर फिसलन हो गई थी, अचानक युवक का पैर फिसल गया और वह सीढ़ियों से नीचे गिर गया।*

*इस घटना से उसका सिर फट गया और काफ़ी ज्यादा खून बह जाने के कारण इस नौजवान युवक की मौत हो गई। कुछ लोगों ने दूर से आते साधु बाबा को देखा तो आपस में कानाफुसी होने लगीं कि निश्चित रूप से इस साधु बाबा ने थप्पड़ खाकर युवा को श्राप दिया होगा, अन्यथा ऐसे नौजवान युवक का केवल सीढ़ियों से गिर कर मर जाना, बड़े अचम्भे की बात लगती है।*

*कुछ युवकों ने यह बात सुनकर साधु बाबा को घेर लिया एक युवा कहने लगा कि आप कैसे भगवान के भक्त हैं, जो केवल एक थप्पड़ के कारण युवा को श्राप दे बैठे? भगवान के भक्त में तो किंचित भी रोष व गुस्सा नहीं होता, पर आप तो जरा सी बात पर भी धैर्य न कर सके।*

*साधु बाबा कहने लगा भगवान की क़सम मैंने इस युवा को श्राप नहीं दिया।*

*अगर आप ने श्राप नहीं दिया तो ऐसा नौजवान युवा सीढ़ियों से गिरकर कैसे मर गया? तब साधु बाबा ने दर्शकों से एक अनोखा सवाल किया कि आप में से कोई इस सब घटना का चश्मदीद गवाह मौजूद है? एक युवक ने आगे बढ़कर कहा- हाँ, मैं इस सब घटना का चश्मदीद गवाह हूँ। साधु ने अगला सवाल किया- मेरे क़दमों से जो कीचड़ उछला था क्या उसने युवा के कपड़े को दागी किया था? युवा बोला- नहीं, लेकिन महिला के कपड़े जरूर खराब हुए थे।*

*मलंग ने युवक की बाँहों को थामते हुए पूछा- फिर युवक ने मुझे क्यों मारा? युवा कहने लगा- क्योंकि वह युवा इस महिला से बहुत प्रेम करता था और यह बर्दाश्त नहीं कर सका कि कोई उसकी पत्नी के कपड़ों को गंदा करे।*

*युवा की बात सुनकर साधु बाबा ने एक जोरदार ठहाका बुलंद किया और यह कहता हुआ वहाँ से विदा हो गया- भगवान की क़सम मैंने तो उसे श्राप नहीं दिया लेकिन कोई है, जिसे मुझ से प्रेम है। अगर उस युवती का यार सहन नहीं कर सका तो मेरे यार को कैसे बर्दाश्त होगा कि कोई मुझे मारे….. और वह तो इतना शक्तिशाली है कि दुनिया का बड़े से बड़ा राजा भी उसकी लाठी से डरता है।*

*उस परमात्मा की लाठी दीख़ती नही और आवाज भी नही करती, लेकिन पडती है तो बहुत तेज दर्द देती है। हमारे कर्म ही हमें उसकी लाठ़ी से बचाते हैं, अतः हमारे कर्म सदा अच्छे होने चाहिए।*

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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