क्राइम

*100 लोगों का हत्यारा डॉ. का सनसनीखेज खुलासा: मारने के बाद मगरमच्छों को खिलाए शव*

एक डाक्टर की घिनौनी करतूत की पढ़िए पूरी कहानी!

देवभूमि जे के न्यूज़!
नई दिल्ली। गत दिवस पुलिस की अपराध शाखा की नारकोटिक्स सेल ने दुर्दांत हत्यारे डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉ. डेथ को बुधवार को बापरौला से गिरफ्तार किया था। बता दें कि डा. डेथ ने 11 वर्ष तक राजस्थान के जयपुर में क्लीनिक चलाया। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और अमरोहा में दो फर्जी गैस एजेंसियों के संचालन मामले में गिरफ्तार हुआ। 10 वर्ष तक किडनी रैकेट से जुड़ा रहा। 2004 में हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार हुआ।
वहीं अब हैवान देवेंद्र शर्मा के बारे में और चौंकानेवाली जानकारी मिली है। सीरियल किलर डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने पहले कबूला था कि 50 कत्ल के बाद वह मर्डर्स की गिनती भूल गया था। अब उसने माना है कि अबतक वह 100 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, जिसमें से ज्यादातर को उसने यूपी की एक नहर में मौजूद मगरमच्छ का खाना बना दिया।
देवेंद्र शर्मा नाम के इस डॉक्टर को पिछले दिनों दिल्ली से पकड़ा गया है। वह किडनी केस में पिछले 16 साल से सजा काट रहा था और अब परोल पर बाहर था। 20 दिन बाद उसे वापस जेल जाना था लेकिन वह अंडरग्राउंड हो गया था। अब पकड़ेजाने के बाद उसे काले कारनामों का कच्चा चि_ा खुल रहा है।
बताते चलें कि देवेंद्र कैब ड्राइवर्स को उनकी गाडिय़ों के लिए मार देता था। दिल्ली से यूपी जाने के लिए इसके गैंग के लोग जिस टैक्सी को बुक करके उसे ही लूट लेते। पकड़ेजाने के बाद शर्मा ने बताया कि उसने ज्यादातर शवों को उत्तर प्रदेश, कासगंज के हजारा नहर में फेंक दिया। इस नहर में बड़ी संख्या में मगरमच्छ रहते हैं।
शर्मा को अब बीते बुधवार को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। साल 1984 में देवेंद्र शर्मा ने आर्युवेदिक मेडिसिन में अपनी ग्रेजुएशन पूरी करके राजस्थान में क्लीनिक खोला। फिर 1994 में उसने गैस एजेंसी के लिए एक कंपनी में 11 लाख का निवेश किया। लेकिन कंपनी अचानक गायब हो गई। फिर नुकसान के बाद उसने 1995 में फर्जी गैस एजेंसी खोल ली।
शर्मा ने एक गैंग बनाया जो एलपीजी सिलेंडर लेकर जाते ट्रकों को लूट लेता। इसके लिए वे लोग ड्राइवर को मार देते और ट्रक को भी कहीं ठिकाने लगा देते। इस दौरान उसने गैंग के साथ मिलकर करीब 24 मर्डर किए। फिर देवेंद्र शर्मा किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह में शामिल हो गया। उसने सात लाख प्रति ट्रांसप्लांट के हिसाब से 125 ट्रांसप्लांट करवाए। साथ ही साथ ये लोग कैब ड्राइवर्स को मारकर उनकी कैब लूट लेते। ड्राइवर की बॉडी को नहर में फेंक दिया जाता था, और कैब को यूजड कार बताकर बेच दिया जाता।
इसके बाद वह 2004 में पकड़ा गया और 16 साल जयपुर जेल में रहा। फिर अच्छे बर्ताव के लिए उसे जनवरी 2020 को 20 दिन की परोल मिली। लेकिन वह भाग गया और अंडर ग्राउंड हो गया।वह मोहन गार्डन में छिपकर रहने लगा।
वहां एख बिजनेसमैन चूना लगाने वाला था तभी पुलिस को भनक लग गई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया!

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