अजब-गजब!चमोली

*उत्तराखंड फूलों की घाटी में खिले रंग -बिरंगे फूल, बाहरी राज्यों के पर्यटक भी करेंगे दीदार-जानीए क्या है शर्त? *

देवभूमि जे के न्यूज़!

चमोली :- कोरोना संकट के बीच प्रकृति पर्यटन प्रेमियों के लिए एक खुश खबरी है, उतराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान अब प्रकृति पर्यटन हेतु खोल दिया गया है।अब पर्यटक इस फूलों की घाटी में क्वींन ऑफ अल्पाईन हिमालयी फ्लावर्स हिमालायन ब्लू पॉपी सहित गुलाबी “रिवर ब्यूटी” पुष्प का दीदार कर सकेंगे, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने अब पर्यटकों के लिए पार्क में जाने की अनुमति सशर्त दे दी है।अब बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को पार्क का दीदार करने से पहले पार्क के प्रवेशद्वार पर दिखाना होगा कोरोना वायरस का नेगेटिव प्रमाण पत्र,उसके बाद ही फूलों की घाटी में पर्यटक प्रवेश कर सकेंगे।पार्क प्रशासन ने कोरोना संकट बावत सभी एहतियातन कदम उठाये हैं।नंदा देवी नेशनल पार्क जोशीमठ के उपवन संरक्षक एन० बी०शर्मा ने बताया की पार्क का दीदार करने आने वाले टूरिस्ट कोविड -19 नेगेटिव का प्रमाणपत्र दिखा कर घाटी का पास ले सकेंगे। वहीं SDM जोशीमठ अनिल चनियाल ने बताया की घाटी आने वाले पर्यटकों को कोविड – 19नेगेटिव सहित अन्य जरूरी मानकों पर खरा उतरना होगा और इस बावत घांघरिया के लोकल व्यवसाईयों सी भी बातचीत हुई है, वहीं घाटी खुलने की खबर से प्रकृति प्रेमियों में खुशी की लहर है, गौरतलब है की चमोली जिले में 87.5वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली इस खूबसूरत हिमालयी वियावाँन में जैव विविधता का अनमोल खजाना है। जिसके चलते यह दुर्लभ घाटी विश्व के वनस्पति शास्त्रीयों शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद है,घाटी के स्थानीय जानकार और प्रकृति प्रेमी राम नारायण भंडारी ने बताया की इन दिनों घाटी अपने पूर्ण यौवन पर होती है,मिड जुलाई से मध्य अगस्त फूलों की घाटी का सबसे बेस्ट टाईम है,आजकल घाटी गुलाबी रंगों के फूलों मसे शराबोर हो जाती है,घाटी के अंतिम छोर पर पिंक रिवर ब्यूटी पुष्प का बगीचा सबसे आकर्षण का केंद्र आजकल होता है,घाटी के खुलने से कही ने कही लोकल पर्यटन को बढ़ावा जरूर मिलेगा,बशर्ते की वन विभाग और शासन स्थानीय होटल,पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को सहयोग करें।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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