ऋषिकेशधर्म-कर्म

*संत समिति ऋषिकेश एवम् आश्रम धर्मशाला प्रबन्धन समिति द्वारा श्री भरत मन्दिर के पूज्य महंत अशोक प्रपंन्ननाचार्य जी के ब्रह्म्मलीन होने पर उन्हें श्रद्धांजलि दी**

देवभूमि जे के न्यूज़!
ऋषिकेश 17 जुलाई
संत समिति कार्यालय दादू महानद आश्रम रेलवे रोड में संत समिति ऋषिकेश एवम आश्रम धर्मशाला प्रबन्धन समिति द्वारा श्री भरत मन्दिर के पूज्य महंत अशोक प्रपंन्ननाचार्य जी के ब्रह्म्मलिन होने पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किये जाने के साथ ही दो मिनट का मौन रख आत्मा की शान्ति हेतु प्रार्थना की गई ।
शोक सभा को संबोधित करते हुए संत समिति अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत ने कहा कि संत महापुरुषों का न तो जन्म होता है न ही मृत्यु होती है परमात्मा उन्हें सदकार्यो हेतु पृथ्वी पर अवतरित करते है ऐसे ब्रह्ममलीन महंत अशोक प्रपंचार्यजी महाराज द्वारा संन्तो के कर्तव्यों के भांती शिक्षा ,स्वास्थ्य एवम अन्य सभी धर्मिक कार्यो में अग्रणीय रूप से अपनी भूमिका निभाई श्रीभरत मन्दिर परिवार द्वारा शिक्षा के छेत्र में जहा एक और संपूर्ण गढ़वाल के विद्यार्थियों द्वारा लाभ अर्जित किया गया वही दूसरी और ज्योति विशेष विद्यालय द्वारा प्रदेश नही देश के विकलांग बच्चों की मदद की जा रही है संस्कृत विद्यालय एवम अन्नक्षेत्र के साथ ही स्वास्थ्य हेतू भूमि दान कर शान्ति प्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय के निर्माण की आधार शिला रखी महंत विनय सारस्वत ने कहा कि ब्रह्मलिन अशोक परपंन्नचार्य ऋषिकेश क्षेत्र के लिये अभिभावक के रूप में कार्य करते थे जिनके जाने से एक युग की समाप्ति के साथ ही एक महान संत का चले जाना क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
बैठक के पश्चात संत महानपुरुषों द्वारा 2 मिनट का मोन रखकर श्री भरत भगवान से प्रर्थना की उन्हें अपने चरण में स्थान के साथ ही श्री भरत मन्दिर परिवार को इस महान दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे बैठक में समिति महामंत्री महंत रामेश्वर गिरी, महंत धर्मानन्द गिरी ,महंत पूर्णानंद, महंत राजेन्द्र गिरी,स्वामी धर्मवीर ,स्वामी हरिदास, महंत राकेशनन्द ,मंहत कृष्ण।नद, महंत संध्या गिरी ,महंत केवल्यानद, महंत गोपाल बाबा ,महंत कपिल मुनि,महंत धर्मदास ,महंत नित्य।नंद गिरी ,अन्य संत धर्मशाला समिति अभिषेक शर्मा रमाकान्त भारद्वाज ,रवि शास्त्री ,उपस्थित थे

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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