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108 दिनों में अकेले नर्मदा की 3600 किमी परिक्रमा करने वाली उत्तरप्रदेश के बदायूँ जिले की निवासी शिप्रा पाठक ने उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष से शिष्टाचार भेंट की!

देवभूमि जे के न्यूज़ ऋषिकेश!

ऋषिकेश 13 जुलाई।नदी जल स्वच्छता की अलख जगाने के लिए पैदल चलकर 108 दिनों में अकेले नर्मदा की 3600 किमी परिक्रमा करने वाली उत्तरप्रदेश के बदायूँ जिले की निवासी शिप्रा पाठक ने अध्यात्म नगरी ऋषिकेश में प्रवास के दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल से शिष्टाचार भेंट की।इस दौरान विधानसभाध्यक्ष ने शिप्रा पाठक के इस साहसिक एवं प्रेरणारूपी कार्य के लिए उन्हें सम्मानित भी किया।
विधानसभा अध्यक्ष के कैंप कार्यालय में भेंटवार्ता के दौरान शिप्रा पाठक ने अग्रवाल को बताया कि यह परिक्रमा उन्होंने नवम्बर 2018 में प्रारम्भ की थी, जो फरवरी 2019 तक पूरी हो पाई। इसमें 108 दिनों का समय लगा।यह परिक्रमा उन्होंने मध्यप्रदेश के ओमकारेश्वर से प्रारम्भ की थी, जो महराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ होते हुए वापस मध्यप्रदेश में आकर पूरी हुई। शिप्रा कहती हैं कि परिक्रमा के अपने कुछ नियम होते हैं। इसमें पैसा साथ में नहीं ले जा सकते, इसलिए भिक्षावृति पर ही रहना पड़ता है, जो भी चाहिए होता है तो वह मांगना ही पड़ता है।शिप्रा ने बताया कि इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों, कैलाश मानसरोवर, ब्रज की 84 कोस और अयोध्या में लगातार 24 घंटे होने वाली विशेष परिक्रमा भी की है।इसके अलावा मनकामेश्वर पर्वत पर 10 किमी. की परिक्रमा की है।
इस अवसर पर शिप्रा पाठक ने परिक्रमा के दौरान मिले अनुभवों को उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘रिवा’ विधानसभा अध्यक्ष को भेंट की।वह कहती हैं कि रिवा नर्मदा जी का ही नाम है, जब यह बहुत तेजी से बहती हैं, जो उन-उन स्थानों पर इन्हें रिवा बुलाया जाता है।
इस अवसर पर विधानसभाध्यक्ष ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य तय कर लिया जाए हर कठिन कार्य भी आसान हो जाता है। स्पीकर ने ख़ुशी जतायी कि हमारी भावी पीढ़ी धार्मिकता एवं संस्कृति की ओर अग्रसर हो रही है। उन्होंने कहा कि नदी जल की स्वच्छता के लिए के लिए नर्मदा की पैदल परिक्रमा कर शिप्रा ने समाज के लिए एक मिसाल पेश की है।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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