ऋषिकेशधर्म-कर्मशहर में खास

*परमहंस स्वामी समर्पणानंद सरस्वती- हिमालय के आधुनिक युग के वैज्ञानिक योगी एवं संत*

व्यक्ति विशेष!

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश!
भारतीय योग साधना की कुछ गुप्त रीती जो की सिर्फ गुरु शिष्य परंपरा से चलती आ रही है! ऋषिकुल में तपस्या और कठोर साधना से अर्जित ज्ञान जो मैंने पाया है आज आपके सामने उजागर करूँगा।
कुल की गरिमा को बनाये रखने के लिए जो की आज अपनी आखरी सांस ले रहा है उसे जन-जन तक पहुंचाना उसके विषय वस्तु से अवगत करना एक सच्चे साधक के लिए जरूरी है!
योग शास्त्र की रचना देवों के देव महादेव से ही हुई है, और महादेव से माता पार्वती को और फिर बिष्णुजी और ब्रह्माजी को प्राप्त हुआ और फिर ऋषि कुल को यह ज्ञान प्राप्त हुआ।
गुरु शिष्य की परंपरा से आज कुछ चुनिंदा लोग हैं जिसे इस गुढ ज्ञान का रहस्य का पूरा ज्ञान भंडार प्राप्त है।

आज समाज की फरेबबाज़ी से और फर्जी गुरुओं के प्रभाव से आज इस ज्ञान का खुलासा नहीं हो पाया और गुप्त विद्या होने की कारण योग्य शिष्य को ही यह ज्ञान दिया जाता है।
लक्ष्मण झूला स्थित अपने आश्रम में योग के बेहतर शिक्षा वैज्ञानिक रूप में स्वामीजी ने अबतक ४६ देशों में सिखाया हैं, योग एवं वेदांत सहित सारे विश्व में इस ज्ञान का स्वामी जी विगत २५ वर्षों से शिक्षा दे रहे है।

संस्कृत में पंचागनी साधना का अर्थ पाँच अग्नि में ध्यान केन्द्रित करना होता हैं। पंचागनी विद्या का व्याख्यान छांडुकय उपनिषद के खंड चार के १०वें अध्याय में किया गया है इसके साथ साथ वृहदारणयकय उपनिषद के खंड २ में भी किया गया हैं। यह हमारे वैदिक ग्रंथो का ४१ वाँ ग्रंथ हैं इस पंचागनी विद्या का उददेश्य यह होता है कि जिसमें पाँच स्वरूपों का वर्णन किया गया हैं। तथा पंच तत्व पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश के रूप में भी होता हैं। जैसा कि आपको हमने उपर बताया कि पंचांगनी विद्या वैदिक काल में माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए की थी। पंचागनी साधना में साधक चार अग्नि कुंडो के बीच बैठकर एवं पाँचवा सूर्य की आराधना करते हुए ध्यान करते हैं। यह साधना सभी लोगों के लिए नहीं होती है, इस साधना को करने के लिए साधक को मोह, लोभ, काम, क्रोध एवं मध्य का त्याग करना पड़ता हैं। पंचागनी विद्या उत्तरायण में शुरू होकर दक्षिणायन के शुरुआत में समाप्त होती हैं। ऐसा कहा जाता है की मुक्ति पाने के लिए उत्तरायण ही सबसे अच्छा समय होता है और हर तरह की धार्मिक साधना करने का भी अच्छा समय होता हैं।
पंचागनी विद्या वातावरण एवं वायुमंडल को शुद्ध करती है जिसका असर कोरोना के ऊपर भी देखने को मिला है इसके चारों ओर का वातावरण ग्रीन जोन में हैं। यह साधना स्वामी समर्पणानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी किया गया हैं। तथा स्वामी जी द्वारा इस वर्ष यह साधना ६ माह तक किया गया।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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93 Comments

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