शहर में खास

*लोक सांस्कृतिक विरासत पर आधारित फिल्मों के पट कथा लेखक के साथ गढ़वाली साहित्य का पुरोधा सत्येंद्र चौहान “सोशियल”*

देवभूमि जे के न्यूज़, ऋषिकेश!
जैकि क्वे बोलि नि च भाषा नि च,
तैकि क्वे ब्वै नि च बाबा नि च!
उक्त पंक्तियाँ एक ऐसे लोक संस्कृति पर आधारित संवादों के लेखक, सरलता, शिष्टता,एवं सदैव प्रत्येक व्यक्ति के साथ अपनी व्यवहार वाणी
तथा सहयोगात्मक भाव रखने वाला ,मित्रों मे अपनी मुस्कान व सम्मान के लिए प्रतिष्ठित सत्येंद्र चौहान #सोशियल#के नाम से पहचान रखने वाला , जिसका जन्म पहाड़ों की वादियों के लिए शैलानियों का स्वर्ग –
श्री तारकेश्वर महादेव की भूमि ग्राम -घोटला रिखणीखाल जिला पौड़ी गढ़वाल में हुआ ,

सत्येंद्र सिंह चौहान सोशल की प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव में हुई ,गांव मे शिक्षा की अच्छी व्यवस्था न होने के कारण कक्षा 6 से अपने अग्रज श्री नरेंद्र सिंह चौहान के साथ ऋषिकेश नगरी में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आया जूनियर की पढ़ाई पूर्णानंद इंटर कॉलेज में उसके बाद की शिक्षा श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में हुई ,ऋषिकेश डिग्री कॉलेज से एम काम तक उच्च शिक्षा प्राप्त की आर्थिक स्थिती कमजोर होने के कारण बीकॉम प्रथम वर्ष से ही सोशल ग्रुप ऑफ कंपनी मे पार्ट टाइम जॉब से जुड़ गये , और 1 साल बाद ही कंपनी में शिक्षा के साथ-साथ अपनी सेवाएं शुरू कर दी , माता – पिताजी की सेवा के कारण कम उम्र में ही पारिवारिक जवाबदारियां बढ़ गई संघर्षों से सदैव आगे बढ़ते रहे ,
बचपन से ही
सांस्कृतिक कार्यक्रमो गांव मे रामलीला के साथ साथ अनेक लोक संस्कृति के मंचों पर अभिनय किया जिसके कारण गढ़ साहित्य की तरफ अभिरुचि बढ़ती गई इस प्रकार के कार्यक्रमों मे भाग लेने का शौक था जब पहली बार गढ़वाली फिल्म घर जमाई ऋषिकेश हॉल में देखी तो मन में अपनी संस्कृति के प्रति लगाव उत्पन्न हुआ गढ़वाली फिल्मों में हीरो बनने की इच्छा थी परंतु संघर्षों ने साहित्यकार बना दिया। कॉलेज के समय में मित्र अशोक चौहान एक सांस्कृतिक संस्था बनाई थी जिसका नाम दैनंदिनी कला मंच था उस टीम के द्वारा हमने कई कार्यक्रमों में भाग लिया जिसमें कुंजापुरी मेला गोचर मेला और आसपास के कई क्षेत्रीय कार्यक्रमों में भाग लिया ,
साहित्य के प्रति रुझान आवाज़ संस्था के संस्थापक अशोक क्रेजी को प्रेरणा स्रोत मानते हुए आवाज संस्था के कई संकलनों मे गढ़वाली रचनाएँ प्रस्तुत की, आवाज संस्था का सहयोग और सानिध्य मुझे जब से मिला है , लगातार आवाज के माध्यम से क्षेत्र के विभिन्न मंचों पर कवि सम्मेलनों मे जाने का सौभाग्य मिला डॉक्टर राजे सिंह नेगी जीने ऋषिकेश में पहली बार गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन किया और उसमें मुझे भी अवसर दिया उसके बाद गढ़वाली कवि सम्मेलन आकाशवाणी एवं दूरदर्शन में भी मुझे अवसर मिला और उत्तराखंड राज्य के अतिरिक्त कई प्रान्तों के कवि सम्मेलन में जाने का अवसर मिला जिससे मुझे पहचान मिली। मेरे परम मित्र गढ़वाली फिल्मों के नायक निर्देशक अशोक चौहान ने गढ़वाली फिल्म में पटकथा लिखने का मौका दिया उनकी पांच गढ़वाली फिल्मों में तथा यह गाने गढ़वाली फिल्म में पटकथा एवं संवाद लिखने का मौका मिला दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक दादी की पटकथा एवं संवाद लिखने का मौका भी मिला गढ़वाली फिल्म में सर्वप्रथम 1.औंसी की रात 2. जुन्यालि रात 3. जल्मू कु साथ 4.गढ़ गौरव 5. गंगा का मैती 6. छल फिल्मों की पटकथा एवं संवाद लिखें। लॉकडाउन में लगातार फेसबुक पर 9 वीडियो कविता 6 लिखित कविता डाली गई जिनमें लोगों का असीमित प्रेम मिला जिनमें मुख्य कविताएं 1 .बस वाली बांद । 2. ढूंगौ की छुई बथ जिसको लोगों ने बहुत पसंद करा जिसमें देश विदेशों से लगातार लोगों के फोन आए और लॉकडाउन में फेसबुक पर मेरे लगभग 1500नए मित्र बने 3. गौ धै लगाणु 4. सत्तू सुदामा 5. अपणु क्याचा 6. ब्वे हर्ची गै इत्यादि। और कुछ हिंदी रचनाये । 4 कहानिया भी लिखी।
साहित्यकार सत्येंद्र चौहान आज कलम से अपनी बेहतरीन पहचान बनाये हुए है कई पारिवारिक समस्याएं आने के बाद भी भाई सत्येंद्र आज भी अपनी जन्म भूमि की सेवा के लिए अपनी रचनाओं के साथ समर्पित हैं ।
आवाज संस्था के महत्वपूर्ण स्तम्भ सोशियल की रचनाएँ सदैव उत्कृष्ट रही हैं जो निश्चित रूप से आने वाले समय मे उत्तराखण्ड की नई पीढ़ी को अपणि बोलि भाषा का प्राश्रय देकर अपणि संस्कृति अपणि पछयाण को आगे बढ़ाएंगी ।

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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