ऋषिकेशशहर में खास

उत्तराखण्ड देवभूमि के गिरीपद पर विराजमान नगरी मे साहित्य संस्कृति का प्रेरक अशोक शर्मा (क्रेजी)!

देवभूमि जे के न्यूज, ऋषिकेश!

मनुष्य स्वभाव से देवतुल्य है। संसार के अर्थहीन छल-प्रपंच या और परिस्थितियों के वशीभूत होकर वह अपना देवत्व खो बैठता है। साहित्य इसी देवत्व को अपने स्थान पर प्रतिष्ठित करने की चेष्टा करता है, उपदेशों से नहीं, नसीहतों से नहीं, भावों को स्पंदित करके, मन के कोमल तारों पर चोट लगाकर प्रकृति से सामंजस्य उत्पन्न करके। हमारी सभ्यता साहित्य पर ही आधारित है। हम जो कुछ हैं, साहित्य के ही बनाए हैं। विश्व की आत्मा के अंतर्गत भी राष्ट्र या देश की एक आत्मा होती है। इसी आत्मा की प्रतिध्वनि है – साहित्य।
साहित्य मनुष्य के विचारों की अभिव्यक्ति का एक बहुत ही प्रमुख माध्यम है। यह अपने ज्ञान के अमृत से समाज एवं संस्कृति दोनों को सार्थक दिशा देने का एक सशक्त पर्याय है। साहित्य के द्वारा मनुष्य की आत्मा और बुद्धि निर्मल होती है।
इसी क्रम मे –
संस्कार, संस्कृति और साहित्य की धाराओं को पतितपावनी जान्ह्वी भागीरथी के तट पर अपने साहित्य गुरुओं द्वारा बोये ज्ञान बीजों को पल्लवित पुष्पित करने का संकल्प लिए जो तिल -तिल समर्पित होकर साहित्य के अनुष्ठान के ज्ञान यज्ञ की अग्नि को विषम परिस्थिति मे भी प्रज्वलित रखे हुए हैं -कलम का प्रहरी शहर की साहित्यक संस्था आवाज़ का बीजारोपण करने वाले प्रतिभा के धनी अशोक शर्मा (क्रेजी)के नाम से सम्पूर्ण जनमानस मे प्रसिद्ध हैं।नवोद्विद साहित्यकारों के लिए मंच के साथ प्रेरणा के आलोक पुंज कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।
अशोक क्रेजी को जहाँ मुनिकीरेती मे संस्कारों के गंगाजल युक्त साधारण परिवार मे जन्म लेने का सौभाग्य मिला वहीं लगभग 11 वर्ष की अवस्था मे माँ की ममतामय वात्सल्यमय आँचल से वंचित होने दुख मिला, माँ के जाने से जीवन पिता के रक्षण मे संवर्धित हुआ और यही मातृत्व की छाया का अभाव अशोक को साहित्य संवेदनाओं के सरोवर की ओर ले गया ।
विज्ञान वर्ग (MSC जन्तु विज्ञान )के होनहार विद्यार्थी रहने के बाद भी अनेकों साहित्यक विषयों की उपाधियों से विभूषित होकर साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर के रूप मे आज भी अपनी पहचान बनाये हुए हैं।
आवाज़ संस्था के मंच पर अनेक नवोदविद रचनाकारों को जोड़ने के साथ स्वयं अनेकों पुस्तकों के लेखक एवं संकलन कर्ता के रूप मे साहित्य शिखर की ओर अग्रसर हैं ।
प्रमुख संकलनों मे –आवाज़ ,पहाड़ बदल रहा, दो कदम, अस्तित्व,मम्मी जी की बिंदी गोल, अनुतरीय प्रश्न,देवभूमि का पलायन जैसे अनेक व्यक्तिगत एवं संस्था के सामूहिक संकलन पाठकों तक पहुंचे हैं।
साहित्य के साथ-साथ सांस्कृतिक मंचों मे -मुनिकीरेती का प्रसिद्ध मेला क्रेजी मेला जो नेता जी सुभाष जयंती पर लगता है वर्तमान मे विकास मेले के नाम से जाना जाता है उसके संस्थापक रहे ,वतर्मान मे शहर की कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े होने के कारण सेवा तीर्थ को प्रबल बनाये रहते हैं।एक सुयोग्य शिक्षक के रूप मे वर्तमान सम्प्रति यमकेश्वर पौड़ी मे विज्ञान विषय के सन्दर्भदाता हैं ।
हमेशा सरलता ,सहजता ,आभा मण्डल पर मुस्कान, विषयों के ज्ञान की गहनता,सबके मनोबल बढ़ाने वाले अशोक क्रेजी भले ही कद – काठी मे छोटे हैं लेकिन मजबूत इरादों की ऊंचाई देवभूमि के शिखरों जैसी महानता आज भी इनके व्यक्तित्व मे देखने को मिलती है ।

साहित्यक संस्था आवाज़ के अनेकों कवि राष्ट्रीय मंचों पर देवभूमि की माटी की खुशबू को समय -समय पर पहुंचाने का कार्य करते हैं ।
अशोक भाई को अनन्त शुभकामनाओं के साथ इस साहित्य ज्योति को निरन्तर आलोकित रखने की बधाई! लेखक-डॉ सुनील दत्त थपलियाल (लेखक श्री भरतमंदिर इंटर कालेज में अध्यापक है!)

जय कुमार तिवारी

*हमेशा सच का साथ देना! ईमानदारी से आगे बढ़ना, दीनहीनों की आवाज को आगे पहुंचाना। सादा जीवन उच्च विचार और प्रकृति के बनाए हुए दायरे में जीवन निर्वहन करना। झूठ बोलने वालों और फरेब से दूर रहना, कभी किसी के अहित की बात नहीं सोचना। ईश्वर मेरे साथ हमेशा खड़े हैं!*

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